कदम 11: क्रिसमस कि कहानी – परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा

हज़ारों साल पहले, प्रभु यीशु के जन्म होने से पहले परमेश्वर ने एक भविष्यवक्ता, यशायाह को यीशु के बारे में घोषणा करने के लिए कहा, “एक कुवांरी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखा जायेगा – जिसका अर्थ है परमेश्वर हमारे साथ” यशायाह 7:14, मत्ती 1:23 पूरे पुराने नियम के माद्य्यम से परमेश्वर ने मसीह के बारे में वादा किया — एक उद्धार कर्ता आएगा और वह हमें, हमारे पापी  स्वभाव से बचाएगा और परमेश्वर के पास हमें ले चलेगा |फिर परमेश्वर के निर्धारित समय पर प्रभु यीशु ने स्वर्ग की महिमा छोड़ दी और एक मानव का रूप धारण करके छोटा बच्चा बनकर धरती पर जन्म लिया | परमेश्वर ने एक भक्त कुवांरी यहूदी लड़की मरियम के पास एक दूत भेजा जिसने उसे बताया “आप एक बेटे को जन्म दोगी, वह परम प्रधान परमेश्वर का पुत्र कहलायेगा” |

तो मरियम परमेश्वर के चमत्कार (वचन) के द्वारा गर्भवती हुई | उस समय मरियम की शादी युसूफ नाम के बढ़ाई के साथ तय हो गयी थी | परमेश्वर ने युसूफ से कहा वह, मरियम को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर ले | इस प्रकार उसे एक अविवाहित माँ होते हुए संरक्षण मिल गया |परमेश्वर ने उनसे कहा कि वह पैदा होने वाले बच्चे का नाम “यीशु” रखे जिस का अर्थ है परमेश्वर बचाता है “वह अपने लोगों को उनके पापों से बचाएगा”|जब निर्धारित समय आया, यीशु मसीह, जो परमेश्वर का पुत्र है और अति पवित्र है, और परमेश्वर के स्वरुप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा|  वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरुप धारण किया,  और मनुष्य बन कर इस पापी दुनिया में आ पहुँचा, आप के लिए और मेरे लिए |क्या यह अति अद्भुत नहीं है ? क्या हम इसकी कल्पना कर सकते है ? लेकिन परमेश्वर ने किया, मेरे और आपके लिए |

प्रार्थना : सर्वशक्तिमान परमेश्वर, हम आपको धन्यवाद देते हैं क्योंकि आपने अपने पुत्र को हमारे लिए भेजा और हमें बचाने की योजना की |

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