कदम 21: शैतान – परमेश्वर का शत्रु – हमारा शत्रु

क्या आपने कभी इस दुनिया की बुराई के बारे में सोचा है वह कहां से आती है और उसके पीछे कौन है ? क्या आपने एक ऊंची आवाज़ अपने अंदर सुनी है जो कहती है कि दुनिया में ऐश करो और आपको ये गलत लगती है |

बाइबिल के अनुसार हर बुराई के पीछे शैतान है | वह परमेश्वर का शत्रु है | उसका मुख्य काम है परमेश्वर से सब को दूर करना |हम शैतान के बारे में बाइबिल की पहली पुस्तक उत्पत्ति में देखते हैं l परमेश्वर ने अदन का बाग़ आदम और हव्वा को दिया ताकि वे उसमे रहकर आनंद लें, परमेश्वर ने उनको चेतावनी भी दी – जो पेड़ बगीचे के बीच में है उसका फल न खाना |“यदि तुम उस फल को खाओगे तो तुम मर जाओगे” |पहले ही अवसर पर शैतान ने उनको बहकाया –  और कहा, क्या परमेश्वर ने मना किया है इस फल को खाने के लिए? तुम नहीं मरोगे | इसे खा लो | शैतान झूठा है यह बाइबिल बताती है |

फल सुन्दर लग रहा था जैसे सारी गलत चीजें सुन्दर लगती हैं |आदम और हव्वा सही चुनाव कर सकते थे | परमेश्वर की बात मानना या शैतान की। परमेश्वर ने उन्हें छूट दी हुई थी |दुर्भाग्यवश उन्होंने शैतान की बात माना – परमेश्वर की नहीं |इस पाप के साथ उन्होंने सब कुछ खो दिया | परमेश्वर की उपस्थिति और उसकी सुरक्षा भी |

अदन में शैतान प्रफुल्लित हुआ की सब उसके काबू में है | उनकी आत्माओं को उसने संकलों से बाँध दिया और गुलाम बना दिया | वह और उनकी औलाद आत्मिक गुलाम पैदा होते है|

लेकिन हम जानते है परमेश्वर हमें कितना प्यार करता है, हमें उसने शैतान के हाथ में नहीं दिया | वह हमें शैतान से छुड़ाने आया |

प्रार्थना:  प्रभु हमारी सहायता कीजिये आपकी बातों को मानने केलिए, ना कि शैतान कि |

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