कदम 4: अँधेरे से प्रकाश (ज्योति) में

मैं अपने जीवन की गफलत में खो गया था और अँधेरे में ठोकरें खाते हुए आशा के बिना चल रहा था |एक दिन मैं ने सुना कि प्यार से भरी एकआवाज मेरा नाम लेकर मुझे बुलारही है |  यह प्रभु यीशु की आवाज थी | उन्हों ने कहा ” मैं दुनिया कि रोशनीं हूँ, मेरा पीछा करो, तो तुम अँधेरे में कभी नहीं रहोगे । और मैं तुम्हारे जीवन का मार्गदर्शक बनूँगा ।” मैंने खुशी से उनका आमंत्रण स्वीकार कर लिया । उनके प्रकाश में मैंने अपना कदम रखा। अब मुझे कोई डर नहीं है । वे मेरा हाथ पकड़ कर मुझे चलाते है । मैं सिर्फ उनका अनुसरण करता हूँ ।

मैं नहीं जानता कि इस धरती  पर मेरा जीवन कैसा होगा । लेकिन प्रभु यीशु जानता है ।  उन्हों ने मेरे लिए योजनाऐं बनाई है । वे कहते है : “मैं जानता हूँ कि आपके जीवन के लिए क्या योजनाएं है | वे अच्छी योजनाएं है |” वह कहते है मैं तुम्हे कभी नहीं छोड़ूंगा न तुम्हे ठुकराऊँगा | मुझे उन पर विश्वास है |मैं जानता हूँ कि मैं उनकी देख रेख में सुरक्षित हूँ |मैं अपनी चिंता और समस्याओं को लेकर उनके पास छोड़ देता हूँ | वे मुझे चलने का मार्ग दिखाते है |आपने भी प्रभु यीशु के प्रकाश में कदम रखा है , वह आपका हाथ पकड़ रहे है | इस जीवन में वह आपको मार्गदर्शन दे रहे है | आप हमेशा के लिए सुरक्षित हो |

प्रार्थना : धन्यवाद प्रभु येशु | आप मेरे जीवन का प्रकाश और मार्गदर्शक हो |

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