कदम 5: प्रार्थना — परमेश्वर से बातचीत

आपने प्रभु यीशु की आज्ञा पालन करने का फैसला किया है | आप सोच रहे होंगे मैं उनसे कैसे बात करूँ |परमेश्वर से बात करना “प्रार्थना” कही जाती है |हमारे हर दिन के अध्ययन के अंत में, प्रभु यीशु के लिए प्रार्थनाएं थी | यदि आप ने आवाज उठाकर या सच्चे विश्वास के साथ अपने मन ही मन प्रभु यीशु से कुछ कहा है,  तो आप पहले से ही प्रार्थना कर चुके है |मैं अलग अलग तरीकों से प्रभु यीशु से प्रार्थना करती हूँ |

  • जब मैं उनकी आराधना करना चाहती हूँ मैं शांति पूर्ण वातावरण ढूंढ़ती हूँ |
  • मैं अपने घुटनों के बल बैठकर, हाथ जोड़ती हूँ |
  • मैं अपनी आँखें बंद करती हूँ ताकि सिर्फ उन पर ध्यान रहे |
  • मैं आम तौर पर घर पर ही या चर्च में इस तरह से प्रार्थना करती हूँ |

अन्य समय में जहॉं भी मैं हूँ मैं अपना सिर झुखाकर और अपनी आँखे बंद करके प्रार्थना करती हूँ | मैं जहाँ भी हूँ वहाँ मन ही मन प्रार्थना करती हूँ — स्कूल या कॉलेज में, काम पर या घर में, यात्रा करते या घाड़ी चलाते समय, काम करते समय, या कार्यालय में – किसी भी समय मैं प्रभु यीशु को याद करती हूँ | जब मुझे उनकी जरूरत हो या कोई बात करने के लिए चाहत हो तो मैं उनसे बातें करती हूँ |जिस तरह हम हमारे  माता या पिता, या किसी करीबी दोस्त से बात करते है, उसी तरह हम प्रभु यीशु के साथ भी बात कर सकते हैं |

वे चाहते हैं की हम उनके पास आये और उनके साथ बात करें, हम अपने दिल की बात उन्हें बताये |मैं जब सुबह उठ ती हूँ मैं उनसे बात करती हूँ , और रात को जब मैं सोती हूँ , मैं उनसे बात करती हूँ | वे मुझे अपनी शांति और खुशी देते है | यह कितना बड़ा तोहफा है जो परमेश्वर से हमें मिला | वह कभी दूर नहीं है न व्यस्त है हमारी प्रार्थनाऐं सुनने के लिए |यह आश्वासन हमें बाइबिल में परमेश्वर से है: “परंतु परमेश्वर ने तो सुना है; उसने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है |”  भजन संहिता 66:19

प्रार्थना : प्रिय प्रभु यीशु , मैं आपको धन्यवाद देती हूँ कि, जब भी मुझे जरूरत है आप मेरे नज़दीक हैं और आप मेरी प्रार्थना सुनते हैं |

 

 

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