कदम 16: प्रभु यीशु – हमारा जीवित उद्धार कर्ता

शिष्यों ने प्रभु यीशु को पीड़ित हो कर क्रूस पर मरते हुए देखा |उनके बिना वे अपने आप को भयभीत, अकेला और डरा हुए महसूस कर रहे थे |  तीसरे दिन जो रविवार  था  उनमे से कुछ कब्र के पास गए और वहां पर वे आश्चर्य चकित हो गए |खुली कब्र के पास एक स्वर्गदूत खड़ा था | उसने शिष्यों को  फतहपूर्वक  कहा – प्रभु यीशु यहाँ नहीं है |जैसे उन्होंने कहा था वे मौत से जी उठे हैं | शिष्यों का दुःख खुशी में बदल गया| उनका प्रभु जीवित था |उसी दिन वे अपने प्यारे शिष्यों से मिलने आये | उन्होंने अपने हाथ और पाँव के घाव उनको दिखाए | शिष्यों को कोई शक न था कि उनका प्रभु शारीरिक तौर पर जीवित है| वे सिर्फ एक आत्मा नहीं थे |

प्रभु यीशु ने उनके लिए और हमारे लिए, हमेशा के लिए, पाप और मृत्यु पर फतह प्राप्त कर ली , हमारा शरीर मर जाएगा पर हमारी आत्मा हमेशा प्रभु के साथ रहेगी |

उन्होंने कहा ” परमेश्वर ने संसार से ऐसा प्रेम किया कि उन्होंने अपना एकलौता पुत्र देदिया , ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नष्ट न हो परंतु हमेशा का जीवन (अनंत जीवन) पाए “|

यह है महिमायुक्त जी उठने का सन्देश  परमेश्वर की ओर से जो सब विश्वासियों के लिए है |मेरे दोस्त, क्या आप इस आश्चर्य करने वाली वाचा, जो प्रभु यीशु ने दी उस पर विश्वास करते हैं ? गुड फ्राइडे को दुनिया के सारे मसीही उनके त्याग और क्रूस की मृत्यु को याद करते हैं |दो दिन बाद हम ख़ुशी से उनके जी उठने का दिन — ईस्टर के रविवार को और उनकी वाचा, कि हम जीवन भर उनके साथ रहेंगे बड़ी ख़ुशी से मनाते हैं  |

प्रार्थना :  प्यारे प्रभु मैं आप की आराधना करता हूँ क्योंकि आप मेरे जीवित उध्दारकर्ता हैं | अनंत जीवन जो आपने मुझे दिया उसके लिए में आप को धन्यवाद देता हूँ |

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