कदम 29: क्या प्रभु यीशुही एकमात्र मार्ग है परमेश्वर के पास पहुँचने के लिए?

प्यारे दोस्त, क्या आप सोच रहे हैं कि यीशु मसीह ही एक मात्र मार्ग है परमेश्वर के पास पहुँच ने के लिए ? दुनिया में बहुत से धर्म है। क्या ये सब हमें परमेश्वर से नहीं जोड़ते? मैं चाहता हूँ कि आप मेरे मित्र रवि से मुलाकात करें जिन्हों ने सच्चाई को प्राप्त किया | वह आप को अपनी कहानी बताएंगे |

रवि: मैं एक जवान व्यक्ति था, और मेरे पास अच्छा नौकरी थी| लेकिन मैं अशांत था| मेरे जीवन मे कुछ खालीपन था| मेरे अंदर एक इच्छा थी  कि मैं परमेश्वर से मुलाकात करू | मुझे पता था कि परमेश्वर है, लेकिन उन्से मिलने का रास्ता मैं नहीं जानता था|  मैंने अपने पारिवारिक धर्म में परमेश्वर को ढूंडना शुरू किया| सारी रीति रिवाजों को पूरा किया, गरीबों को दान दिया और उपवास रख कर प्रार्थना भी की | लेकिन मैं परमेश्वर के नज़दीक नहीं पहुँच सका | मुझे लगा कि मेरे और मेरे परमेश्वर के बीच में एक गहरी खाड़ी है, जो मुझे उनसे अलग कर रही थी |

मैंने दुसरे धर्म की ओर भी देखा और पाया कि, हर धर्म उस खाड़ी के पास आकर रुख जाति थी | “मैं इस बड़ी खाड़ी को पार कैसे कर सकता हूं और भगवान तक पहुंच सकता हूँ?” मैंने हताशा में सोचा था | एक दिन मैं ने एक सन्देश सुना कि, यह खाड़ी, जो मेरे और मेरे परमेश्वर के बिच है वह मेरे पापों हैं | परमेश्वर पवित्र है और मैं पापी हूँ | मैं पापों के सात परमेश्वर के नज़दीक नहीं जा सकता हूँ | “भगवान, मैं क्या करूँ?” मैंने निराशा में रोया। स सन्देश में मैंने यह भी सुना कि, प्रभु यीशु जो परमेश्वर का पुत्र है, उन्होंने आपके पापों के लिए क्रूस पर बलि दान होकर उस खाड़ी के ऊपर पुल बांध  दिय | ये सुन के मैं दौड़ कर उन्के पास जाके उनसे मेरे पापों के लिए माफ़ी मांगी | यीशु मसीह मेरे पापों की कीमत क्रूस पर दे चुके थे, इसलिए उन्होंने मेरे पापों को आनंद से माफ़ करदिया, और मेरे दागों को हटादिया | अब मेरे पाप धुल गाये और मैं शुद्ध हूँ |प्रभु यीशु ने मेरा हाथ थामा और हम साथ साथ उस खाड़ी के ओर गए और पाया की एक पुल उस पर बंधा हुआ था जो क्रूस की आकार मैं था | हम दोनों उस पुल को पार करके दूसरी ओर पहुंचे, जहाँ परमेश्वर पिता हमारा इंतजार कर रहे थे | मेरी ख़ुशी की कोई सीमा नहीं थी और मैं उनकी चरणों पर गिरकर उन्की आराधना करने लगा | मैं ने पीछे मुड़ कर जब देखा तो बहुत से लोग अलग अलग मार्गोंसे परमेश्वर की खोज में थे, लेकिन उस खाड़ी के पास आकर रुख जाते थे और अपनी परिश्रम से उस को पार नहीं कर पारहे थे | वे परमेश्वर को पुकार रहें थे लेकिन कुछ नहीं हासिल हो रहा था | यीशु के पास आने से पहले मैं भी उसी अवस्था में था | परन्तु जो लोग प्रभु यीशु के पास आकर पापों की माफ़ी मांग रहे थे उन्होंने उस खाड़ी को यीशु के साथ पार कर लिया और परमेश्वर के साथ आनंद मनारहे थे|

अब मैं प्रभु यीशुही की सच्चाई जो बाइबिल में है समझ गया हूँ|“मैं ही मार्ग हूँ, सत्य हूँ और जीवन हूँ। बिना मेरे द्वारा कोई भी परम पिता के पास नहीं आता।“ यूहन्ना 14:6

ये है रवि की जीवन की कहानी | अब उन्होंने अपनी पुरानी पाप की जिंदगी छोड़ दि और नई जिंदगी, पाप रहित जिंदगी अपनी प्रभु यीशु के लिए जीते है |

मेरे दोस्त, क्या आप प्रभु यीशु के पास आकर अपने पापों की माफ़ी पाएंगे? परमेश्वर की खोज पूरी करेंगे ?

प्रार्थना : प्रभु यीशु, मैं पूरी दिल से विश्वास करता हूँ कि आप ही एकमात्र मार्ग है परमेश्वर के पास पहुँचने के लिए | आपने मेरे पापों के लिए क्रूस पर अपने आप को बलि दान किया और मुझे माफ़ किया और परमेश्वर से मेल करवाया | इसके लिए मैं आप का धन्यवाद देता हूँ | आमीन  

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