कदम 27: चर्च – इस दुनिया में हमारा मसीही परिवार

क्या हम दूसरे चर्च में जाऐं? हम एक घर के पास रुकते हैं | यहाँ चर्च की ईमारत तो नहीं है | पर हम अंदर जाकर देखते हैं |

कुछ परिवार के लोग अंदर एकत्रित हैं | और हमारा स्वागत स्नेह से किया गया | वहां कोई बाध्य नहीं था पर स्तुति के गीत गाये जा रहे थे | स्तुति के गीत बहुत मधुर होते हैं और आत्मा से भरकर सब गाते हैं |दसरे चर्च में, अगुवा भाई ने प्रार्थना किया, बाइबिल पढ़ा और सन्देश दिया |आराधना समाप्त होने के बाद हम, सब भाई- बहनों से मिले |

आप सोच रहे होंगे की चर्च होता क्या है | प्रभु यीशु के चर्च की ईमारत नहीं होती | जहाँ भी लोग मिलकर आराधना करते हैं और एक दूसरे की मदद और प्रार्थना करते हैं, वह चर्च कहलाया जाता है |बाइबिल बताती है कि पूरी दुनिया में एक ही चर्च है | इसका अर्थ यह है कि पूरी दुनिया के मसीही लोग जो प्रभु यीशु पर विश्वास करते हैं, इस चर्च के भाग हैं |मसीह कलीसिया का सिर है | कलीसिया उसकी देह है और वह उसका उद्धार कर्ता है| – इफिसियो 5: 23 जैसे आप इसको पढ़ रहे होंगे, आप कहीं के भी हो, आप की भाषा चाहे कोई भी हो, आप विश्व चर्च के सदस्य हैं |मसीह में मेरे भाइयों और बहनों, क्या यह अद्भुत नहीं है ? मैं आपसे प्रेम करता हूँ और आपके लिए प्रार्थना करता रहूँगा|क्या आप प्रसन्न नहीं है चर्च आकर, परमेश्वर के परिवार के साथ उसकी आराधना करके |

प्रार्थना : प्रभु यीशु, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मुझे विश्व चर्च का सदस्य बनाया है |

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